विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में प्रदोष के उप-भेद बताए गए हैं: 1. नित्य प्रदोष: प्रतिदिन सूर्यास्त के समय शिव की उपासना करना। यह सन्यासियों और निवृत्त मार्गियों के लिए होता है। 2. पक्ष प्रदोष: प्रत्येक पक्ष (शुक्ल और कृष्ण) की त्रयोदशी को किया जाने वाला व्रत। यह गृहस्थों के लिए अभीष्ट है और यही प्रचलित 'प्रदोष व्रत' है। 3. महाप्रदोष: जब त्रयोदशी तिथि शनिवार (शनि प्रदोष) या सोमवार (सोम प्रदोष) को पड़ती है, तो उसे महाप्रदोष की संज्ञा दी जाती है। शिवरात्रि को भी महाप्रदोष के तुल्य माना गया है।

