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विस्तृत उत्तर
परा-वाक् वाणी की सबसे सूक्ष्म और अव्यक्त अवस्था है। यह वह ध्वनि है जो शब्द, अक्षर और उच्चारण से भी पहले चेतना में स्थित रहती है। इस कथा में आदिनाद को परा-वाक् कहा गया क्योंकि वह भौतिक भाषा नहीं था, बल्कि सृष्टि की प्रथम चेतन ध्वनि थी। परा-वाक् से ही आगे स्थूल शब्द, मंत्र और ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति का क्रम शुरू होता है।
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