विस्तृत उत्तर
पाशुपतास्त्र को चलाने की विधि इसकी दिव्यता को प्रमाणित करती है। इसे न केवल धनुष से बाण के रूप में छोड़ा जा सकता था बल्कि इसे मन के संकल्प से, दृष्टि मात्र से, या केवल शब्दों के उच्चारण से भी चलाया जा सकता था। यह इसकी बहुमुखी प्रतिभा और इसके पीछे की मानसिक एवं आध्यात्मिक शक्ति को इंगित करता है। केवल मन में संकल्प करने या नजरों से देखने भर से यह अस्त्र सक्रिय हो जाता था जो इसे अन्य सभी दिव्यास्त्रों से अलग और विशेष बनाता है।
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