विस्तृत उत्तर
पिंगलेश्वर लिंग 'पिशाचमोचन कुंड' (प्राचीन विमलोदक तीर्थ) के एकांत में स्थित है। यह कुंड मृत्यु-उपरांत कर्मकांडों, अकाल मृत्यु को प्राप्त आत्माओं के उद्धार और परलोक-विज्ञान का विश्व-प्रसिद्ध केंद्र है, जहाँ महर्षि वाल्मीकि ने एक प्रेत का उद्धार किया था। इस मृत्यु और पारलौकिक शक्तियों के केंद्र के समीप होने के कारण, पिंगलेश्वर अघोरियों, कापालिकों और वाममार्गियों की 'एकांत साधना' का एक अत्यंत गुप्त और शक्तिशाली केंद्र रहा है। यहाँ की श्मशान-तुल्य ऊर्जा साधक के भीतर गहन वैराग्य उत्पन्न करती है।





