विस्तृत उत्तर
शास्त्रों और वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर में रखी जाने वाली मूर्ति की धातु का विशेष महत्व है।
शुभ धातुएँ (प्राथमिकता क्रम)
- 1सोना (स्वर्ण) — सर्वश्रेष्ठ धातु, सबसे सात्विक ऊर्जा। व्यावहारिक रूप से अधिकांश लोगों के लिए संभव नहीं।
- 2चाँदी (रजत) — अत्यंत शुभ, चंद्रमा से संबंधित, शीतल और सात्विक ऊर्जा प्रदान करती है।
- 3ताँबा (ताम्र) — शुभ धातु, सूर्य ऊर्जा से संबंधित, रोग निवारक गुण।
- 4पीतल (काँसा/ब्रास) — सबसे प्रचलित और व्यावहारिक विकल्प। तांबे और जस्ते का मिश्रण होने के कारण यह सकारात्मक ऊर्जा देती है।
- 5अष्टधातु (अष्ट धातु मिश्रण) — सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा, जस्ता, टिन, सीसा और पारा — ये आठ धातुओं का मिश्रण अत्यंत शुभ माना जाता है।
अन्य शुभ सामग्री
- ▸संगमरमर (मार्बल) — शुभ, शांत ऊर्जा।
- ▸मिट्टी — शुभ, प्राकृतिक।
- ▸पत्थर — नर्मदा नदी का पत्थर (बाणलिंग) विशेष शुभ।
- ▸स्फटिक (क्रिस्टल) — अत्यंत शुभ, विशेषतः शिवलिंग और गणेश के लिए।
अशुभ/वर्जित धातुएँ
- ▸लोहा (Iron) — पूजा के लिए अशुभ।
- ▸स्टील (Steel) — वर्जित।
- ▸एल्यूमीनियम — पूजा के लिए उपयुक्त नहीं।
व्यावहारिक सुझाव: अधिकांश घरों के लिए पीतल या ताँबे की मूर्ति सबसे उपयुक्त विकल्प है — यह सुलभ, टिकाऊ और शास्त्रसम्मत है।





