विस्तृत उत्तर
शंख (Conch Shell) सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में शंख को समुद्र मंथन से उत्पन्न बताया गया है और इसे विष्णु भगवान का प्रतीक माना जाता है।
शंख में जल रखने के लाभ
- 1पवित्र जल (शंख जल) — शंख में रखा जल पवित्र माना जाता है। इसे गंगाजल के समान शुद्ध माना जाता है। पूजा में इस जल का उपयोग अभिषेक और आचमन में होता है।
- 1वैज्ञानिक गुण — शंख कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) से बना होता है। इसमें रखा जल कैल्शियम से समृद्ध होता है। कुछ शोध बताते हैं कि शंख जल में रोगाणुनाशक गुण होते हैं, यद्यपि व्यापक वैज्ञानिक प्रमाण सीमित है।
- 1वातावरण शुद्धि — शंख में जल भरकर पूजा स्थल और घर में छिड़काव करने से वातावरण शुद्ध होता है।
- 1त्वचा रोग — आयुर्वेद में शंख जल को त्वचा रोग और एलर्जी में लाभकारी बताया गया है (शंख भस्म का प्रयोग चिकित्सा में होता है)।
- 1ध्वनि शुद्धि — शंख बजाने से वातावरण शुद्ध होता है। शंख की ध्वनि हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करती है — ऐसा दावा किया जाता है, यद्यपि वैज्ञानिक प्रमाण सीमित है।
नियम
- ▸दक्षिणावर्ती शंख (दाहिनी ओर खुलने वाला) अत्यंत दुर्लभ और विशेष शुभ माना जाता है। इसमें जल रखकर लक्ष्मी पूजा में उपयोग करें।
- ▸वामावर्ती शंख (बाईं ओर खुलने वाला) सामान्य है और पूजा में ध्वनि हेतु उपयोग होता है।
- ▸शंख को स्वच्छ रखें, जल प्रतिदिन बदलें।
- ▸शंख में जल भरकर रात भर रखें, प्रातः आचमन या छिड़काव करें।
- ▸शिव पूजा में शंख से जल नहीं चढ़ाते — शिवलिंग पर शंख जल वर्जित है (कुछ परंपराओं में)।





