विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण और वास्तु शास्त्र के अनुसार शंख समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से एक है और इसे पूजा घर में रखना अत्यंत शुभ माना जाता है।
शंख रखने का स्थान
- ▸शंख को पूजा कक्ष में मूर्तियों के सामने, नुकीले सिरे को अपनी ओर रखकर स्थापित करें।
- ▸पूजा कक्ष के उत्तर, पूर्व या ईशान कोण में रखना उत्तम है।
- ▸शंख को लाल या सफेद पवित्र कपड़े पर रखें।
- ▸चाँदी के आसन पर रखना विशेष शुभ माना जाता है।
महत्वपूर्ण नियम
- 1एक स्थान पर दो शंख नहीं — पूजा स्थल पर एक समय में एक ही शंख रखना शुभ है।
- 2पूजा वाला शंख और बजाने वाला शंख अलग रखें — फूंकने वाले शंख से जल अर्पण या पूजा नहीं करनी चाहिए।
- 3नियमित शुद्धिकरण — शंख को गंगाजल से समय-समय पर शुद्ध करें।
- 4शंख पर स्वस्तिक बनाकर चंदन, फूल और दीप से पूजा करें।
- 5स्थापना का शुभ दिन — शिवरात्रि या नवरात्रि पर शंख स्थापित करना विशेष शुभ है।
शंख में जल रखने का विधान: दक्षिणावर्ती शंख में रात्रि को जल भरकर रखें, प्रातःकाल उस जल को घर में छिड़कें — इससे वास्तु दोष दूर होते हैं।





