विस्तृत उत्तर
गंगाजल का महत्व गंगा पुराण और विष्णु पुराण में विस्तार से वर्णित है:
1सर्वोच्च शुद्धिकारक
गंगाजल सभी जलों में श्रेष्ठ है। विष्णु पुराण में कहा गया है — 'गंगाजलं सर्वपापहरम्' — गंगाजल सभी पापों का नाश करता है।
2तीर्थराज
गंगा तीर्थों की रानी है। पूजा में गंगाजल का उपयोग करना — समस्त तीर्थों का स्नान करने के समान है।
3वैज्ञानिक महत्व
गंगाजल में बैक्टीरियोफेज (विषाणु) पाए जाते हैं जो हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करते हैं। गंगाजल वर्षों तक शुद्ध रहता है।
4पूजा में उपयोग
- ▸आचमन
- ▸अभिषेक
- ▸तीर्थ जल के रूप में
- ▸पंचामृत में मिलाना
- ▸मूर्ति स्नान
5स्कंद पुराण
पापिनां पावनं गंगा, तापिनां शीतलं जलम्।
भक्तानां मोक्षदायिनी, विष्णुपादाब्जसंभवा।'
— गंगा पापियों को पवित्र, दुःखियों को शीतल और भक्तों को मोक्ष देती है।
घर में गंगाजल रखने का नियम
ताँबे के बर्तन में, ऊपर से ढककर, स्वच्छ स्थान पर।




