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पूजा सामग्री📜 गंगा पुराण, विष्णु पुराण — गंगा महात्म्य, स्कंद पुराण1 मिनट पठन

पूजा में गंगाजल का महत्व क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

गंगाजल का महत्व: सर्वोच्च शुद्धिकारक। विष्णु पुराण: 'गंगाजलं सर्वपापहरम्।' पूजा में: आचमन, अभिषेक, मूर्ति स्नान। वैज्ञानिक: बैक्टीरियोफेज से वर्षों शुद्ध रहता है। घर में ताँबे के बर्तन में रखें। एक बूँद भी पूजा जल को पवित्र करती है।

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विस्तृत उत्तर

गंगाजल का महत्व गंगा पुराण और विष्णु पुराण में विस्तार से वर्णित है:

1सर्वोच्च शुद्धिकारक

गंगाजल सभी जलों में श्रेष्ठ है। विष्णु पुराण में कहा गया है — 'गंगाजलं सर्वपापहरम्' — गंगाजल सभी पापों का नाश करता है।

2तीर्थराज

गंगा तीर्थों की रानी है। पूजा में गंगाजल का उपयोग करना — समस्त तीर्थों का स्नान करने के समान है।

3वैज्ञानिक महत्व

गंगाजल में बैक्टीरियोफेज (विषाणु) पाए जाते हैं जो हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करते हैं। गंगाजल वर्षों तक शुद्ध रहता है।

4पूजा में उपयोग

  • आचमन
  • अभिषेक
  • तीर्थ जल के रूप में
  • पंचामृत में मिलाना
  • मूर्ति स्नान

5स्कंद पुराण

पापिनां पावनं गंगा, तापिनां शीतलं जलम्।

भक्तानां मोक्षदायिनी, विष्णुपादाब्जसंभवा।'

— गंगा पापियों को पवित्र, दुःखियों को शीतल और भक्तों को मोक्ष देती है।

घर में गंगाजल रखने का नियम

ताँबे के बर्तन में, ऊपर से ढककर, स्वच्छ स्थान पर।

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शास्त्रीय स्रोत
गंगा पुराण, विष्णु पुराण — गंगा महात्म्य, स्कंद पुराण
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