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विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार, यदि कोई पूर्वज प्रेत बनकर भटकता है और वंशज श्राद्ध या मुक्ति के उपाय नहीं करते, तो वह उन्हें कष्ट देने लगता है। प्रेत बाधा होने पर मति, प्रीति, रीति, लक्ष्मी और बुद्धि का विनाश हो जाता है। तीसरी या पांचवीं पीढ़ी में ऐसे कुल का पूर्णतः विनाश हो जाता है। उस वंश के प्राणी जन्म-जन्मांतर तक निःसंतान, पशुहीन, दरिद्र, रोगी और जीविका-रहित होते हैं। इस प्रकार प्रेत बाधा केवल व्यक्ति को नहीं, पूरे कुल और वंश को प्रभावित करती है।
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