विस्तृत उत्तर
पूजा में सुगंधित द्रव्य जलाना षोडशोपचार का एक प्रमुख अंग है। शास्त्रों में कहा गया है कि गंध (सुगंधित द्रव्य) अर्पण से 'यश-कीर्ति का विस्तार' होता है।
आध्यात्मिक लाभ: सुगंधित धूप का धुआँ मन को शांत और एकाग्र करता है। सुगंध नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है और पूजास्थल में दिव्य वातावरण बनाती है। देवताओं को सुगंध अत्यंत प्रिय है — इसलिए धूप जलाने से देवता शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
वैज्ञानिक लाभ: विभिन्न सुगंधित द्रव्यों में रोगाणुनाशक गुण होते हैं। चंदन, लोबान, गुग्गुल और अगरु के धुएँ में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं जो हवा में रोगाणुओं को नष्ट करते हैं।
विभिन्न सुगंध के फल: गुग्गुल — वास्तुदोष नाश, क्लेश दूर, देवताओं का वास। लोबान — भूत-प्रेत बाधा निवारण, शत्रु-शमन। चंदन — मन की शांति, देवता-प्रसन्नता। कर्पूर — वातावरण पूर्ण शुद्धि, नकारात्मकता विनाश। अगरु/अगरबत्ती — सामान्य दैनिक पूजा, मन-शांति।
नियम: सुगंध देवता की विशेषता के अनुरूप चुनें — भगवान विष्णु को चंदन-अगरु, शिव को भस्म-अगरु, देवी को गुलाब-केवड़ा प्रिय हैं।





