विस्तृत उत्तर
पुंश्चली अतल लोक की तीन प्रकार की स्त्रियों में से तीसरी हैं। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार ये वे स्त्रियाँ हैं जो अस्थिर स्वभाव की होती हैं, अपना साथी निरंतर बदलती हैं और चारित्रिक रूप से चंचल होती हैं। इनकी उत्पत्ति भी बल असुर की जम्हाई से हुई थी। ये तीनों प्रकार की स्त्रियाँ मिलकर अतल लोक में प्रविष्ट होने वाले पुरुषों को अपने प्रेमजाल में फंसाती हैं। वे उन्हें एकांत में ले जाकर हाटक रस पिलाती हैं और अपनी कामुक दृष्टि, मनमोहक मुस्कान और आलिंगन से उन्हें पूर्णतः वशीभूत कर लेती हैं।
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