विस्तृत उत्तर
जब माता लक्ष्मी ने ब्राह्मणी वेश में सुतल लोक जाकर महाराजा बलि को रक्षासूत्र बांधा और उन्हें अपना भाई बना लिया, तब महाराजा बलि इस स्नेह से अत्यंत भावविभोर हो गए। उन्होंने ब्राह्मणी वेश में आई माता लक्ष्मी से कहा कि वे अपनी इच्छा के अनुसार कोई भी उपहार या वरदान मांग सकती हैं। इसी अवसर पर माता लक्ष्मी ने कहा कि यदि वे उन्हें वास्तव में अपनी बहन मानते हैं और उपहार देना चाहते हैं, तो उनके पति को मुक्त कर दें, जो दिन-रात बलि के महल के द्वारपाल के रूप में पहरा दे रहे हैं।
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