विस्तृत उत्तर
श्री राम रक्षा स्तोत्र की रचना ऋषि बुधकौशिक ने की थी। स्तोत्र के आरंभ में स्वयं इसका उल्लेख मिलता है: 'अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः' — अर्थात इस स्तोत्र के ऋषि बुधकौशिक हैं।
स्तोत्र की रचना के विषय में एक अत्यंत सुंदर पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि एक रात भगवान शंकर ने ऋषि बुधकौशिक को स्वप्न में दर्शन दिए और उन्हें यह राम रक्षा स्तोत्र सुनाया। प्रातःकाल जागने पर बुधकौशिक ने उस स्वप्न में सुने स्तोत्र को वैसे का वैसा लिख लिया। स्तोत्र में स्वयं इस घटना का वर्णन एक श्लोक में है: 'आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः। तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः।।' — जिसका अर्थ है: भगवान शंकर ने स्वप्न में जैसा आदेश दिया, उसी प्रकार प्रातःकाल जागने पर बुधकौशिक ने इसे लिख लिया।
स्तोत्र में देवता श्रीसीतारामचन्द्र हैं, छंद अनुष्टुप् है, शक्ति सीता हैं और कीलक हनुमान जी हैं। यह संस्कृत भाषा में रचित 38 श्लोकों का कवच स्तोत्र है जिसमें भगवान राम के विभिन्न नामों और रूपों से अंग-अंग की रक्षा की प्रार्थना की गई है। इसे प्रतिदिन पढ़ने से समस्त संकटों से सुरक्षा होती है और जो इसे कंठस्थ कर ले उसे सर्व सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं — ऐसा स्तोत्र की फलश्रुति में कहा गया है।





