विस्तृत उत्तर
महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत रामायण में सात काण्ड हैं जिनमें कुल लगभग 24,000 श्लोक और 500 से अधिक सर्ग हैं। इसी प्रकार गोस्वामी तुलसीदास द्वारा अवधी भाषा में रचित श्रीरामचरितमानस में भी सात काण्ड हैं।
सातों काण्डों के नाम और उनका संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है — बालकाण्ड: श्रीराम का जन्म, शिक्षा, धनुर्भंग और सीता विवाह। अयोध्याकाण्ड: कैकेयी के वर, राम का वनवास, दशरथ का प्राणत्याग और भरत-राम मिलाप। अरण्यकाण्ड: वनगमन, शूर्पणखा प्रसंग, खरदूषण वध और सीता हरण। किष्किन्धाकाण्ड: सुग्रीव से मैत्री, बाली वध और वानर सेना का आह्वान। सुन्दरकाण्ड: हनुमान का लंका गमन, सीता से मिलन और लंकादहन। युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): राम-रावण युद्ध, रावण वध और सीता की अग्निपरीक्षा। उत्तरकाण्ड: अयोध्या वापसी, राज्याभिषेक और उत्तर कथाएँ।
बालकाण्ड सबसे बड़ा काण्ड है और किष्किन्धाकाण्ड सबसे छोटा। सुन्दरकाण्ड विशेष रूप से लोकप्रिय है क्योंकि यह एकमात्र काण्ड है जिसका नाम 'सुंदर' है और इसमें हनुमान की विजय का वर्णन है। ध्यान रहे कि कुछ स्थानों पर युद्धकाण्ड को ही लंकाकाण्ड कहते हैं — दोनों एक ही काण्ड के दो नाम हैं।





