विस्तृत उत्तर
रसातल लोक भौतिक आसक्ति का प्रतीक इसलिए है क्योंकि वहाँ के प्राणी आध्यात्मिक आनंद के स्थान पर भौतिक भोगों में लिप्त रहते हैं। रसातल के निवासी असीम संपदा के स्वामी हैं, वे सुरा और उत्तम व्यंजनों का भोग करते हुए समय की गति भी भूल जाते हैं। उन्हें बुढ़ापा, रोग, थकान या साधारण मृत्यु का भय नहीं होता। फिर भी वे आध्यात्मिक ज्ञान और ईश्वरीय भक्ति से शून्य हैं। उनकी चेतना केवल शारीरिक शक्ति और भौतिक ऐश्वर्य तक सीमित रहती है। इसी कारण रसातल भौतिक आसक्ति और शक्ति-अहंकार का प्रतीक माना गया है।
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