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विस्तृत उत्तर
रसातल लोक का विस्तार विशाल और ठोस भूभाग के रूप में बताया गया है। ब्रह्मांड पुराण के प्रक्रिया पाद में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक अधोलोक का विस्तार दस हजार योजन है और यह पूर्ण रूप से एक ठोस और विस्तृत भूभाग है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार इन सातों अधोलोकों की लंबाई और चौड़ाई पृथ्वी, अर्थात भूमंडल, के समान है। इसलिए रसातल केवल गहराई में स्थित लोक नहीं, बल्कि व्यापक और बहु-आयामी भूमिगत क्षेत्र है।
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