विस्तृत उत्तर
रसातल लोक स्वर्ग से भी अधिक ऐश्वर्यशाली इसलिए माना गया है क्योंकि रसातल सहित अधोलोकों को बिल-स्वर्ग कहा गया है, जहाँ स्वर्ग से भी अधिक भौतिक सुख, संपदा, विलासिता और ऐश्वर्य उपलब्ध हैं। रसातल में मय दानव द्वारा निर्मित भव्य नगर, गगनचुंबी महल, विस्तृत प्रांगण और स्वर्ण जड़ित मंदिर हैं। महल मूल्यवान रत्नों, स्फटिकों और स्वर्ण से निर्मित हैं। उद्यानों में कल्पवृक्ष लगे हैं, झीलें और सरोवर दिव्य कमलों से भरे हैं और कोकिलों की मधुर ध्वनि गूंजती रहती है। महर्षि नारद ने इन लोकों का भ्रमण कर देवलोक में इंद्र और देवताओं के सामने स्वीकार किया था कि पाताल और रसातल का सौंदर्य, संपदा और विलासिता इंद्र के स्वर्ग से भी कहीं अधिक बढ़कर है।
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