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विस्तृत उत्तर
रसातल में सुदर्शन चक्र का नियंत्रण ईश्वरीय प्रशासन जैसा कार्य करता है। रसातल के असुर स्वतंत्र, उग्र और युद्धप्रिय हैं तथा किसी देवता या शासक के अधीन रहना स्वीकार नहीं करते। पर श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार उनकी स्वच्छंदता पर एकमात्र अंकुश भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र का है। सुदर्शन चक्र का तेज इस लोक में निरंतर एक ईश्वरीय प्रशासक का कार्य करता है, जो इन असुरों को रसातल की सीमाओं से बाहर जाकर ब्रह्मांडीय व्यवस्था को भंग करने से रोकता है।
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