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विस्तृत उत्तर
रावण सुतल लोक अपनी दिग्विजय और अधोलोकों को जीतने की लालसा से गया था। कथा के अनुसार, जब लंकापति रावण अपनी शक्ति के मद में चूर होकर त्रिलोकी को जीतने के लिए निकला, तो उसने कुबेर, यक्षों और स्वर्ग के देवताओं को पराजित कर दिया। स्वर्ग और पृथ्वी को जीतने के बाद उसके मन में अधोलोकों को जीतने और वहाँ के राजाओं को अपने अधीन करने की इच्छा उत्पन्न हुई। इसी क्रम में रावण अपनी विशाल सेना और अहंकार के साथ महाराजा बलि को चुनौती देने के लिए सुतल लोक के द्वार पर पहुँचा।
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