विस्तृत उत्तर
हिंदू धर्म के किसी भी अनुष्ठान का आरंभ निर्विघ्नता के प्रतीक भगवान गणेश की वंदना से होता है।
यजमान सर्वप्रथम घी का दीपक प्रज्वलित कर गुरु, कुलदेवता और माता-पिता का स्मरण करता है:
ॐ गुरुभ्यो नमः, ॐ गणेशाय नमः, ॐ कुल देवताभ्यो नमः, ॐ इष्ट देवताभ्यो नमः, ॐ माता पितृभ्यां नमः
गणपति पूजन के लिए 'गणपति अथर्वशीर्ष' का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है। इसकी शुरुआत शांति मंत्र से होती है:
ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः...
तत्पश्चात गणेश जी को 'ॐ गं गणपतये नमः' और गणेश गायत्री 'एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि। तन्नो दंतिः प्रचोदयात्॥' का जप करते हुए लाल चंदन, दूर्वा और मोदक अर्पित किए जाते हैं।





