विस्तृत उत्तर
रुद्राभिषेक 'रुद्र' देवता के लिए किया जाता है — जो भगवान शिव का वैदिक और सर्वाधिक शक्तिशाली नाम है।
'रुद्र' का अर्थ
तैत्तिरीय संहिता में 'रुद्र' की व्याख्या:
- ▸'रुत् = दुःख' और 'द्रावयति = भगाने वाले' → रुद्र = दुःख भगाने वाले
- ▸'रुद् = रोदन' → रुद्र = रुलाने वाले (संसार में माया से)
- ▸शाकल संहिता: 'रुद्र = द्रावयति रोगम्' — रोग को नष्ट करने वाले
श्री रुद्रम् में रुद्र के 108 रूप
तैत्तिरीय संहिता (4.5) में रुद्र के विभिन्न रूपों का वर्णन:
- ▸उग्र रुद्र — युद्ध और विनाश के देवता
- ▸भव — सृष्टि के देवता
- ▸शर्व — धरती के देवता
- ▸पशुपति — प्राणियों के स्वामी
- ▸ईशान — आकाश के देवता
- ▸महादेव — सर्वोच्च देवता
रुद्र = शिव के अष्टमूर्ति रूपों में एक
शिव पुराण: भव, शर्व, रुद्र, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान, महादेव — ये शिव के आठ रूप हैं। 'रुद्राभिषेक' इन सभी रूपों को एकसाथ प्रसन्न करता है।
लिंग पुराण: रुद्र = शिव का 'संहारक' रूप जो पुराने को नष्ट करके नए को जन्म देता है — वास्तव में वे परम कल्याणकारी हैं।





