विस्तृत उत्तर
पूजन या जप के दौरान अनजाने में हुई किसी भी प्रकार की विधिगत त्रुटि या भूल के लिए अंत में क्षमा प्रार्थना की जाती है। यह अहंकार को कम करती है और सिद्धि में बाधा दूर करती है।
साधना में 'क्षमा प्रार्थना' क्यों की जाती है को संदर्भ सहित समझें
साधना में 'क्षमा प्रार्थना' क्यों की जाती है का सबसे सीधा सार यह है: साधना या पूजा के दौरान हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा माँगना आवश्यक है।
भूतनाथ मंत्र साधना जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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क्षमा प्रार्थना मंत्र के बोल और हिंदी अर्थ क्या है?
'आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्...' यह क्षमा प्रार्थना का मुख्य मंत्र है। इसका अर्थ है— हे प्रभु, मैं न आपका आवाहन करना जानता हूँ, न विसर्जन और न ही पूजा की विधि। मेरी मंत्रहीन और क्रियाहीन पूजा को स्वीकार कर मुझे क्षमा करें।
मंत्र जप के बाद 'क्षमा प्रार्थना' क्यों जरूरी है
जप या पूजा में अनजाने में हुए उच्चारण, विधि या ध्यान के दोषों को मिटाने और अपने अहंकार को नष्ट करने के लिए अंत में क्षमा प्रार्थना करना अनिवार्य है, तभी अनुष्ठान पूर्ण होता है।
मंत्र का गलत उच्चारण सुधारने का उपाय
गलत उच्चारण के दोष से बचने के लिए जप के अंत में क्षमा प्रार्थना करें और 'ॐ विष्णवे नमः' का मानसिक स्मरण करें। उच्चारण हमेशा गुरु मुख से सुनकर ही सुधारना चाहिए।
पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना क्यों करते हैं?
कोई भी कर्मकांड पूर्णतः त्रुटिहीन नहीं होता — उच्चारण दोष, द्रव्य कमी, मन भटकाव संभव है। इसलिए अंत में क्षमा प्रार्थना अनिवार्य है। मंत्र: 'करचरणकृतं वाक् कायजं... सर्वमेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो।'
पारद शिवलिंग पूजा में क्षमा प्रार्थना क्या है?
क्षमा प्रार्थना: 'मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं महेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु ते॥' — मेरी मंत्रहीन, क्रियाहीन पूजा आपकी कृपा से परिपूर्ण हो।
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