विस्तृत उत्तर
पूजन या जप के दौरान अनजाने में हुई किसी भी प्रकार की विधिगत त्रुटि या भूल के लिए अंत में क्षमा प्रार्थना की जाती है। यह अहंकार को कम करती है और सिद्धि में बाधा दूर करती है।
साधना या पूजा के दौरान हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा माँगना आवश्यक है।
पूजन या जप के दौरान अनजाने में हुई किसी भी प्रकार की विधिगत त्रुटि या भूल के लिए अंत में क्षमा प्रार्थना की जाती है। यह अहंकार को कम करती है और सिद्धि में बाधा दूर करती है।
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