विस्तृत उत्तर
पुराणों के अनुसार स्वर्ग आदि लोकों की प्राप्ति सकाम कर्मों, यज्ञों, इष्टापूर्त कर्मों और देवताओं की आराधना से होती है। परंतु महर्लोक, जनलोक और तपोलोक जैसे उच्च लोकों की प्राप्ति केवल भौतिक पुण्यों या सकाम कर्मकांडों से संभव नहीं है। विष्णु पुराण कहता है कि जो लोग केवल लौकिक यज्ञ करते हैं, वे स्वर्ग जाकर पुण्य क्षीण होने पर लौट आते हैं। इसके विपरीत जो ज्ञानी और योगी भगवान के द्वादशाक्षर मंत्र का चिंतन करते हैं, ब्रह्म-ध्यान में स्थित रहते हैं, षड्रिपुओं का नाश करते हैं और निष्काम वासुदेव-भक्ति में लीन होते हैं, वे ऊर्ध्व लोकों को प्राप्त कर वापस नहीं आते। ऐसे वासुदेव-परायण सिद्ध योगी तपोलोक को प्राप्त करते हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





