विस्तृत उत्तर
सपिण्डीकरण के दिन प्रेत के पिण्ड को पितामह और प्रपितामह के पिण्डों के साथ वैदिक मन्त्रों द्वारा मिला दिया जाता है। इस कर्मकाण्ड के पूर्ण होते ही देव-वर्गों में क्रमिक पदोन्नति होती है। जो जीव कल तक प्रेत था, वह अब पितृलोक में आधिकारिक प्रवेश कर वसु, अर्थात प्रथम पीढ़ी का पितृ, बन जाता है। जो पहले वसु स्थान पर था, वह रुद्र बनता है; जो पहले रुद्र स्थान पर था, वह आदित्य बनता है; और जो पहले आदित्य स्थान पर था, वह मुख्य पिण्डभाज् वर्ग से बाहर होकर लेपभाज् श्रेणी में चला जाता है। इस प्रकार सपिण्डीकरण प्रेत को पितृ पद देता है।
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