विस्तृत उत्तर
सत्यलोक भौतिक ब्रह्माण्ड के एकदम शीर्ष पर स्थित है। यह ब्रह्माण्ड के ठीक शीर्ष पर भौतिक और आध्यात्मिक जगत की सीमारेखा पर स्थित है। तपोलोक से बारह करोड़ योजन की ऊँचाई पर भौतिक ब्रह्माण्ड का मुकुटमणि सत्यलोक विराजमान है। श्रीमद्भागवत पुराण (५.२०.३७ एवं ५.२३.९) के आधार पर इसकी खगोलीय स्थिति का वर्णन मिलता है। सूर्य से सत्यलोक की कुल दूरी तेईस करोड़ अड़तीस लाख योजन है जो आधुनिक मापदंडों के अनुसार लगभग एक अरब सत्तासी करोड़ चार लाख मील बैठती है। यह ब्रह्माण्ड के भौतिक आवरण के भीतर की दूरी है। सत्यलोक के ऊपर से ही वैकुण्ठ लोक (सनातन आध्यात्मिक जगत) का आरम्भ होता है।
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