विस्तृत उत्तर
कौषीतकि ब्राह्मण उपनिषद के अनुसार सत्यलोक के मुख्य द्वार पर इन्द्र और प्रजापति द्वारपाल के रूप में उपस्थित रहते हैं। यह अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य है कि देवराज इन्द्र जो स्वर्गलोक के राजा हैं वे सत्यलोक में द्वारपाल की भूमिका निभाते हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि सत्यलोक की महत्ता स्वर्गलोक से कहीं अधिक है। इसके अंदर सलज्ज नामक नगर, अपराजिता नामक भवन और विभु नामक एक विशाल प्रांगण है। प्रांगण के भीतर विचक्षण नामक सिंहासन है जिस पर अमितौजस (असीम तेज वाला) नामक आसन है जहाँ ब्रह्मा जी विराजमान रहते हैं।
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