विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण के द्वितीय अंश के आठवें अध्याय में महर्षि पराशर मैत्रेय मुनि को ब्रह्माण्ड के प्रकाश का वर्णन करते हुए बताते हैं कि सत्यलोक में प्रकाश की व्यवस्था किसी सूर्य, चन्द्रमा या अग्नि पर निर्भर नहीं है। सत्यलोक का प्रकाश का स्रोत भगवान ब्रह्मा के अपने शरीर की असीम कान्ति और सत्यलोक की स्वयंप्रभा है। सूर्य की किरणें सत्यलोक तक अवश्य पहुँचती हैं किन्तु वहाँ पहुँचकर वे ब्रह्मा की असीम कान्ति के समक्ष पूरी तरह से निस्तेज और क्षीण हो जाती हैं ठीक वैसे ही जैसे सूर्य के समक्ष दीपक का प्रकाश। सत्यलोक का स्वयं का प्रकाश इतना तीव्र और चिन्मय है कि करोड़ों सूर्यों का प्रकाश भी उसके समक्ष नगण्य प्रतीत होता है। यह ज्ञान, शान्ति और सत्य की वह दिव्य ज्योति है जो आत्मा को परमानन्द से भर देती है।
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