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शिव पूजा📜 शिव पुराण, भागवत पुराण (8वाँ स्कंध), स्कंद पुराण2 मिनट पठन

सावन में शिव पूजा क्यों की जाती है?

संक्षिप्त उत्तर

सावन में शिव पूजा क्यों: समुद्र-मंथन श्रावण में हुआ — हलाहल पीने पर शिव को शीतलता देने की परंपरा। शिव पुराण: 'श्रावणः शिवप्रियः।' ज्योतिष: सूर्य-कर्क + चंद्र-प्रभाव = शिव (चंद्रशेखर) पूजा का सर्वोत्तम काल। सावन-सोमवार — श्रेष्ठतम संयोग।

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विस्तृत उत्तर

सावन (श्रावण) मास में शिव-पूजा का विशेष महत्त्व होने के पीछे कई शास्त्रीय कारण हैं।

1समुद्र-मंथन और हलाहल (भागवत पुराण, 8वाँ स्कंध)

श्रावण मास में ही समुद्र-मंथन हुआ था। जब हलाहल विष निकला, शिव ने उसे पिया। उनका कंठ जलने लगा। देवताओं, ऋषियों और प्रकृति ने उन पर जल अर्पित किया। श्रावण मास में वर्षा = शिव को शीतल करने का प्राकृतिक स्वरूप।

2शिव का प्रिय मास

शिव पुराण: 'श्रावणः शिवप्रियः।' — श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस मास में की गई पूजा का फल सहस्रगुणित होता है।

3ज्योतिषीय कारण

श्रावण मास में सूर्य कर्क राशि में रहता है। इस समय चंद्रमा का प्रभाव अधिक। शिव = चंद्रशेखर। चंद्र-प्रधान मास में शिव-पूजा स्वाभाविक रूप से शक्तिशाली।

4सोमवार का सावन में संयोग

सोमवार = शिव का दिन, सोम = चंद्रमा। सावन का सोमवार = शिव-पूजा का सर्वोत्तम संयोग।

5वर्षा और प्रकृति का नवीनीकरण

स्कंद पुराण: श्रावण में वर्षा से धरती हरी-भरी — प्रकृति का पुनर्जन्म = शिव की सृजन-शक्ति का प्रकटन।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, भागवत पुराण (8वाँ स्कंध), स्कंद पुराण
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