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विस्तृत उत्तर
इस कथा में शब्द यानी आदिनाद को सृष्टि का पहला कंपन माना गया है। ध्वनि के प्रकट होने के लिए एक विस्तार या क्षेत्र चाहिए, इसलिए आदिनाद के साथ आकाश की संभावना जागी। आकाश को शब्द तन्मात्रा का क्षेत्र माना गया है। इसलिए कहा गया कि शब्द से आकाश का प्राकट्य हुआ और आगे उसी आकाश में सृष्टि का विस्तार हुआ।
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