विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण में सात अधोलोकों के नाम अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल बताए गए हैं। महर्षि शुकदेव द्वारा इन्हें 'बिल-स्वर्ग' कहा गया है। यह वर्गीकरण वैष्णव सम्प्रदाय में सर्वाधिक मान्य है। श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कन्ध के चौबीसवें अध्याय में पाताल लोकों के वातावरण का अत्यंत सूक्ष्म और सजीव चित्रण किया गया है। इन बिल-स्वर्गों में रहने वाले दैत्य, दानव और नाग गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हैं। यहाँ स्वर्ग से भी अधिक काम-भोग, ऐश्वर्य, आनंद और विभूति उपलब्ध है। यहाँ के भवन, उद्यान और क्रीड़ा-स्थल अत्यंत समृद्ध हैं।
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