विस्तृत उत्तर
सुतल लोक को बिल-स्वर्ग इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पृथ्वी के नीचे स्थित अधोलोकों में होते हुए भी नरक नहीं है, बल्कि भूमिगत स्वर्ग के समान है। श्रीमद्भागवत पुराण, विष्णु पुराण और ब्रह्मांड पुराण जैसे प्रामाणिक ग्रंथों में सातों अधोलोकों को सामूहिक रूप से 'बिल-स्वर्ग' अर्थात 'भूमिगत स्वर्ग' की संज्ञा दी गई है। बिल-स्वर्ग का तात्पर्य यह है कि यहाँ का भौतिक ऐश्वर्य, सुख-सुविधाएं, प्राकृतिक सौंदर्य और विलासिता ऊर्ध्व लोकों के स्वर्ग, देवराज इन्द्र के लोक, से भी कहीं अधिक उन्नत, समृद्ध और निर्बाध हैं। सुतल लोक में स्वर्ण, स्फटिक, नीलम और पन्ने से जड़े महल, कल्पवृक्ष जैसे वृक्ष, पवित्र नदियाँ, स्वच्छ सरोवर, दिव्य रत्नों का प्रकाश और भगवान विष्णु की प्रत्यक्ष उपस्थिति इसे विशेष बनाते हैं।
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