विस्तृत उत्तर
सुतल लोक में सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश प्रत्यक्ष रूप से प्रवेश नहीं करता, क्योंकि यह अधोलोक है। फिर भी सुतल लोक पूर्ण अंधकारमय नहीं है। महान नागों के फणों पर स्थित स्व-प्रकाशमान मणियाँ पूरे लोक को प्रकाशित करती हैं। विष्णु पुराण यह भी स्पष्ट करता है कि सूर्य और चंद्रमा की किरणें यहाँ अप्रत्यक्ष रूप से प्रवेश अवश्य करती हैं, पर प्रवेश करते समय वे अपने कष्टकारी भौतिक गुण छोड़ देती हैं। सूर्य की किरणें यहाँ अपनी चमक और प्रकाश तो देती हैं, पर उनका आतप, तीव्र गर्मी या चुभन, निवासियों को नहीं सताता। चंद्रमा की किरणें अपना शुभ्र प्रकाश फैलाती हैं, पर वे कड़ाके की ठंड उत्पन्न नहीं करतीं। इसलिए सुतल लोक का तापमान सदैव सम और आनंददायक रहता है।
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