विस्तृत उत्तर
स्वर्लोक में देवताओं और वहाँ के निवासियों का शरीर पृथ्वी के शरीर से सर्वथा भिन्न होता है। देवताओं का शरीर पंचभौतिक नहीं होता अर्थात यह मिट्टी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के स्थूल संयोजन से नहीं बना होता। बल्कि यह सात्त्विक ऊर्जा से निर्मित 'भोग-देह' होता है। इस दिव्य भोग-देह की विशेषताएं इस प्रकार हैं — इसमें भूख, प्यास और बुढ़ापे का अभाव होता है। यह पृथ्वी के शरीर की तरह रोगों और कष्टों से पीड़ित नहीं होता। इसमें सामान्यतः पसीना नहीं आता (पसीना आना पुण्य क्षीण होने का संकेत है)। देवियां जाम्बूनद स्वर्ण से बने आभूषण पहनती हैं। यह शरीर दिव्य आभा और प्रकाश से युक्त होता है जिससे ही अमरावती प्रकाशित रहती है। स्वर्लोक में आने वाले पुण्यात्मा मनुष्यों को भी उनके कर्मों के अनुरूप ऐसा ही दिव्य शरीर प्राप्त होता है।
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