विस्तृत उत्तर
दस्तावेज़ में कहा गया है कि तपोलोक की संरचना ऐसी है कि वहाँ केवल 'तप' का ताप है, भौतिक अग्नि का ताप वहाँ प्रवेश नहीं कर सकता। नैमित्तिक प्रलय की अग्नि भूर्लोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक को जलाती है और उसका ताप महर्लोक तक पहुँचता है, पर तपोलोक तक नहीं पहुँचता। इसका अर्थ है कि तपोलोक का ताप तपस्या, एकाग्रता, वैराग्य और दिव्य चेतना की ऊर्जा है, जबकि भौतिक अग्नि का ताप संहारक और विनाशकारी है। तपोलोक भौतिक दाह से मुक्त है और वहाँ का वातावरण शांति, नीरवता और समाधि से भरा है।
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