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विस्तृत उत्तर
तपोलोक जैसे उच्च लोकों की प्राप्ति केवल भौतिक पुण्यों या सकाम कर्मकांडों से संभव नहीं है। इन लोकों में प्रवेश के लिए जीव को काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मात्सर्य जैसे षड्रिपुओं का पूर्ण नाश करना अनिवार्य है। क्योंकि तपोलोक भौतिक तृष्णा, विषय-भोग, ऐंद्रिक सुख और माया के बंधनों से मुक्त विशुद्ध सात्त्विक और चिन्मय लोक है, इसलिए वहाँ वही साधक पहुँचते हैं जो वैराग्य, ब्रह्म-ध्यान, आत्म-संतोष और वासुदेव-परायण साधना में स्थित होते हैं।
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