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विस्तृत उत्तर
त्रिपुर दहन में वासुकि नाग भगवान शिव के धनुष की प्रत्यंचा बने। देवताओं के तेज से बने शिव के दिव्य रथ और आयुधों में सुमेरु पर्वत धनुष बना और वासुकि नाग उसकी प्रत्यंचा बने। इसी व्यवस्था से भगवान शिव ने उस अचूक बाण को छोड़ा जिसने तीनों त्रिपुर नगरों को एक साथ भस्म कर दिया।
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