विस्तृत उत्तर
वसु स्थूलता और भौतिक संबंध का प्रतीक इसलिए हैं क्योंकि वे भौतिक तत्त्वों, शरीर और पार्थिव चेतना के धारक देव माने गए हैं। वसु जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि, आकाश, चन्द्र, सूर्य, नक्षत्र और वनस्पति जैसे तत्त्वों से सम्बद्ध हैं। देहत्याग के पश्चात जीव की प्रथम पारलौकिक परिणति और उसका स्थूल सानिध्य वसु रूप में माना जाता है। पिता यजमान के भौतिक शरीर का सबसे निकटतम कारण है, इसलिए प्रथम पीढ़ी का पितृ वसु स्वरूप कहलाता है। वसु अवस्था पितृ यात्रा का सबसे सघन और पार्थिव स्तर है।
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