विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण में पृथ्वी के नीचे सात लोकों का वर्णन मिलता है, पर मूल सूची में रसातल शब्द स्पष्ट रूप से नहीं आता। वहाँ महर्षि पराशर मैत्रेय को अतल, वितल, निताल, गभस्तिमत्, महातल, सुतल और पाताल की सूची बताते हैं। विष्णु पुराण के अन्य अध्यायों और टीकाकारों के अनुसार गभस्तिमत् या निताल को रसातल के दूसरे नाम माना गया है। विष्णु पुराण यह भी मानता है कि इन सातों लोकों में दैत्य, दानव और नाग रहते हैं और इनकी भूमियाँ विभिन्न रंगों की हैं। रसातल की भू-प्रकृति अश्ममयी, अर्थात पथरीली, बताई गई है।
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