विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण के द्वितीय अंश के सातवें अध्याय में लोकों के विस्तार का अत्यन्त सटीक भौगोलिक और गणितीय वर्णन किया गया है। महर्षि पराशर सत्यलोक की दूरी और वहाँ निवास करने वाले ऊर्ध्वरेता मुनियों की गणना (88,000) पर विशेष बल देते हैं। यह पुराण इस बात पर जोर देता है कि सत्यलोक की दिव्यता के कारण सूर्य का प्रकाश वहाँ निस्तेज हो जाता है और ब्रह्मा की स्वयंप्रभा ही प्रधान होती है। विष्णु पुराण मुख्य रूप से सत्यलोक को एक अत्यंत पवित्र किन्तु भौतिक आवरण के भीतर के लोक के रूप में देखता है जिसके पार भगवान विष्णु का परम पद है। विष्णु पुराण के द्वितीय अंश के आठवें अध्याय में सूर्य के प्रकाश के सत्यलोक में निस्तेज होने का विशद वर्णन है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





