विस्तृत उत्तर
वितल लोक मुख्य रूप से भगवान शिव के हाटकेश्वर स्वरूप, माता भवानी, हाटकी नदी और हाटक स्वर्ण के लिए प्रसिद्ध है। श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार अतल लोक के ठीक नीचे वितल लोक में भगवान शिव हाटकेश्वर अथवा हर-भव स्वरूप में विराजमान हैं। वे अपने भूत, प्रेत और गणों से घिरे हुए माता भवानी के साथ निवास करते हैं। भगवान शिव और माता भवानी के दिव्य मिलन के परिणामस्वरूप हाटकी नामक विलक्षण नदी की उत्पत्ति होती है। जब अग्निदेव इस हाटकी नदी के तेज का पान करते हैं और उसे पचा नहीं पाते, तब वह तेज हाटक नामक अत्यंत देदीप्यमान स्वर्ण में बदल जाता है। वितल लोक के असुर राजा और उनकी पत्नियां इसी हाटक स्वर्ण से बने आभूषण धारण करते हैं।
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