विस्तृत उत्तर
वितल लोक को बिल-स्वर्ग इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पृथ्वी के नीचे स्थित होकर भी कष्टदायक नरक नहीं है, बल्कि भूमिगत स्वर्ग के समान अत्यंत समृद्ध लोक है। 'बिल' का अर्थ है गुफा या भूमि के नीचे का स्थान, और 'स्वर्ग' का अर्थ है अपार सुख-सुविधाओं का क्षेत्र। शास्त्रों के अनुसार बिल-स्वर्ग का भौतिक ऐश्वर्य, सुख-सुविधाएं और प्राकृतिक सौंदर्य देवताओं के स्वर्ग से भी अधिक उत्कृष्ट और नयनाभिराम हैं। वितल लोक में सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश सीधे नहीं पहुँचता, पर महान नागों के फनों पर स्थित दिव्य मणियों की रश्मियों से यह लोक जगमगाता रहता है। यहाँ दिन-रात का भेद नहीं, समय का भय नहीं, अनुकूल तापमान, सुंदर वन, नदियाँ, सरोवर, कमलयुक्त जलाशय, मधुर पक्षी-ध्वनि, सुगंधित वायु, चिर-यौवन और विलासिता का वातावरण है।
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