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विस्तृत उत्तर
वितल लोक के अधिपति साक्षात भगवान शिव हैं, जो यहाँ 'हाटकेश्वर' या 'हर-भव' के रूप में निवास करते हैं। वे अपनी अर्धांगिनी माता भवानी और अपने भूत-प्रेत गणों के साथ इस लोक में स्थित हैं। भगवान शिव यहाँ प्रजापति के रूप में श्रृंगार-रस में मग्न रहते हैं। भगवान शिव और माता भवानी के संयोग से जो दिव्य तेज उत्पन्न होता है, वह 'हाटकी' नदी का रूप लेता है, और उसी से आगे चलकर 'हाटक' स्वर्ण की उत्पत्ति होती है।
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