विस्तृत उत्तर
वितल लोक में भगवान शिव की उपस्थिति यह बताती है कि ब्रह्मांड का कोई भी कोना ईश्वर की सत्ता और नियंत्रण शक्ति से मुक्त नहीं है। वितल लोक असुरों, दानवों और मायावी शक्तियों का निवास है, फिर भी इसके सर्वोच्च अधिष्ठाता भगवान शिव हाटकेश्वर रूप में वहाँ विराजमान हैं। असुरों के इस लोक में शिव की उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि चाहे कोई स्थान घोर भौतिकता और तमोगुण से परिपूर्ण क्यों न हो, वहाँ भी ईश्वर की शक्ति का संचार है। वितल लोक भगवान शिव की उपस्थिति के कारण अत्यंत पवित्र है, पर वहाँ के निवासियों की अज्ञानता और आसक्ति के कारण वह माया और भौतिक अंधकार का प्रमुख केंद्र बन जाता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





