विस्तृत उत्तर
वितल लोक में हाटक स्वर्ण का महत्व बहुत बड़ा है क्योंकि यह वहाँ के असुरों के चरम ऐश्वर्य, शक्ति और विलासिता का प्रतीक है। हाटक स्वर्ण पृथ्वी के साधारण सोने से अलग, अत्यंत कांतिमान, दिव्य और अलौकिक बताया गया है। इसमें विशिष्ट प्रकार की मादकता और ऊर्जा होती है। वितल लोक में रहने वाले असुरों के राजा और उनकी पत्नियाँ इसी हाटक स्वर्ण से बने आभूषणों से स्वयं को अलंकृत करते हैं, और इसी कारण वे अत्यंत प्रसन्न और मदमत्त रहते हैं। भगवान शिव की जो ऊर्जा मूलतः आत्मा की मुक्ति, योग और कल्याण के लिए है, उसी ऊर्जा से बने हाटक स्वर्ण का उपयोग वितल लोक के निवासी अपने भौतिक श्रृंगार, विलासिता, मुकुटों और महलों को सजाने के लिए करते हैं।
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