विस्तृत उत्तर
वितल लोक में रोग और बुढ़ापा दिव्य रसायनों, औषधियों और सिद्धियों के प्रभाव से नहीं होता। शास्त्रों के अनुसार इस लोक में बुढ़ापा, रोग, पसीना, दुर्गंध या शारीरिक क्षय का कोई स्थान नहीं है। वहाँ के निवासी दिव्य रसायनों, औषधियों और सिद्धियों के प्रभाव से सदैव युवा, निरोगी और ऊर्जावान बने रहते हैं। उनके हृदय में बुढ़ापे, बीमारी, पसीने, दुर्गंध या मृत्यु का भय नहीं होता, क्योंकि इन लोकों में भगवान द्वारा प्रदान की गई भौतिक सिद्धियाँ और रसायन विद्याएँ उन्हें चिर-यौवन प्रदान करती हैं।
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