विस्तृत उत्तर
वितल लोक पाप का दंड नहीं है, बल्कि सकाम पुण्यों और भौतिक इच्छाओं से जुड़ा भोग-स्थान है। यह नरक नहीं है। नरक लोक सातों पाताल लोकों से भी नीचे हैं, जहाँ पापियों को यातनाएँ दी जाती हैं। वितल लोक में वे आत्माएँ जाती हैं जिनमें तमोगुण और रजोगुण की अधिकता होती है, पर सकाम पुण्यों के कारण उन्हें नरक में नहीं भेजा जाता। वे वैभवशाली पाताल लोकों में जाकर हाटक स्वर्ण से सजे महलों में अपनी वासनाओं को तृप्त करते हैं। इसलिए वितल लोक को पाप का दंड नहीं, बल्कि भौतिक इच्छा और सकाम पुण्य का भोग-फल कहा जा सकता है।
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