विस्तृत उत्तर
वितल लोक स्वर्ग से भी सुंदर इसलिए माना गया है क्योंकि बिल-स्वर्गों का भौतिक ऐश्वर्य, सुख-सुविधाएं और प्राकृतिक सौंदर्य देवताओं के स्वर्ग से भी अधिक उत्कृष्ट और नयनाभिराम बताए गए हैं। श्री विष्णु पुराण में देवर्षि नारद के पाताल भ्रमण का प्रसंग आता है। नारद जी ने पाताल लोकों का भ्रमण करने के बाद देवराज इंद्र की सभा में कहा कि पाताल लोक स्वर्ग से भी अधिक सुंदर और श्रेष्ठ हैं। उन्होंने बताया कि वहाँ नागों के आभूषणों में सुंदर प्रभायुक्त शुभ्र मणियाँ जड़ी हैं, दैत्य और दानव कन्याएँ लोक को सुशोभित करती हैं, और दानव-दैत्य पुत्र-पुत्रियाँ संगीत, वीणा, वेणु, मृदंग, सुगंधित लेप और उत्कृष्ट मदिरा के आनंद में डूबे रहते हैं। यह सब दिखाता है कि भौतिक सुख और ऐश्वर्य के मामले में वितल लोक देवताओं के स्वर्ग को भी परास्त कर देता है।
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