विस्तृत उत्तर
पौराणिक ब्रह्मांड विज्ञान के अनुसार यमलोक एक सुनिश्चित भौगोलिक और आध्यात्मिक आयाम है, जहाँ जीवात्मा मृत्यु के बाद अपने कर्मों का फल भोगने हेतु जाती है। यह भौतिक ब्रह्मांड के भीतर ही स्थित है, परंतु इसकी प्रकृति सांसारिक नहीं है। यह शुद्ध रूप से यातना और कर्म-शोधन का आयाम है जहाँ स्थूल शरीर के बिना केवल सूक्ष्म 'यातना-देह' के माध्यम से ही प्रवेश संभव है। यमलोक ब्रह्मांडीय न्याय व्यवस्था का केंद्र है, जिसमें यमराज न्यायाधीश, चित्रगुप्त अभिलेखक, श्रवण-श्रवणी गुप्तचर और यमदूत दंडाधिकारी के रूप में कार्य करते हैं।
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