विस्तृत उत्तर
३४८ दिनों की कठिन यात्रा और नदियों को पार करने के पश्चात जीवात्मा एक लाख योजन में फैली हुई यमपुरी के मुख्य द्वारों पर पहुँचती है। गरुड़ पुराण के अनुसार यमपुरी के चार मुख्य दिशाओं में चार द्वार हैं, और जीवात्मा का प्रवेश उसके कर्मों के आधार पर निर्धारित द्वार से ही होता है। दक्षिण द्वार पापियों का मार्ग है, पश्चिम द्वार दानवीरों का मार्ग है, उत्तर द्वार सत्यवादियों और पितृभक्तों के लिए है, और पूर्व द्वार योगियों तथा ऋषियों का मार्ग है।
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