विस्तृत उत्तर
यमपुरी धर्मराज यम का नगर है, जहाँ आत्मा 348 दिनों की यात्रा और 86,000 योजन की दूरी तय करने के बाद पहुँचती है। यमपुरी में आत्मा के कर्मों का विचार होता है। यमराज के दरबार में धर्मराज यम सिंहासन पर विराजमान रहते हैं और उनके निकट चित्रगुप्त बैठे रहते हैं। चित्रगुप्त के पास अग्रसंधानी नामक महान पंजिका होती है, जिसमें प्रत्येक जीव के जन्म से मृत्यु तक के एक-एक श्वास और कर्म का सूक्ष्म लेखा-जोखा लिखा रहता है। यमराज इन्हीं कर्मों के आधार पर आत्मा के भाग्य का निर्णय करते हैं।
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